गुरुवार, 28 जून 2007

प्यार करो

प्यार करो कल नहीं आज करो
आज क्यों? अभी करो
लेकिन किसी नेक से करो
फिर भी केवल एक से करो
यह कोई सत्यनारायण का प्रसाद नहीं
कि आप हरेक से करो | 
-दि.म.

3 टिप्‍पणियां:

  1. सही कहा है आपने, जनाब !!

    उत्तर देंहटाएं
  2. सही कहा है कि प्यार सत्यनारायण का प्रसाद नहीं है लेकिन हर एक को प्यार बांटने का मजा शायद आपने नहीं पाया है, इसीलिये ऐसा कह रहे हैं | जब अपना दिल एक साथ सारे जगत को प्यार करने लगता है तो समझ में आता है कि अपना हृदय इतना विशाल हो गया है कि इसमें पूरी दुनिया समा जाती है | तब उस चेतस-विस्तार का जो आनन्द मिलता है, वह किसी भी लौकिक आनन्द या व्यक्तिगत प्रेमों से अतुलनीय होता है | इसलिए सभी से प्यार करिये और सभी से प्यार पाइये |

    उत्तर देंहटाएं
  3. आप सही हैं लेकिन यदि मेरे ब्लोग लेबल पर ध्यान देते तो सारी बात समझ में आ जाती ।

    उत्तर देंहटाएं

आपकी टिप्पणी ही हमारा पुरस्कार है।